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महाकाल मंदिर में पुजारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति पर विवाद, इंदौर हाईकोर्ट ने कलेक्टर से मांगा 3 माह में जवाब; रिश्तेदारी और अतिक्रमण जैसे गंभीर आरोप लगे!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी, पुरोहित और मंदिर समिति के 300 से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस संबंध में उज्जैन निवासी सारिका गुरु द्वारा दायर याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए उज्जैन कलेक्टर से तीन माह के भीतर जवाब तलब किया है।
याचिका में लगाए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता सारिका गुरु का आरोप है कि मंदिर समिति ने किसी प्रकार की विज्ञप्ति जारी किए बिना और पात्रता की जांच किए बिना नियुक्तियां की हैं। उनका कहना है कि मंदिर परिसर के 40 से अधिक मंदिरों में कार्यरत पुजारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति पूरी तरह अपारदर्शी रही है।
सारिका गुरु ने आरोप लगाया कि मंदिर समिति ने न तो अखबारों में विज्ञापन निकाला और न ही किसी प्रकार की परीक्षा या इंटरव्यू की प्रक्रिया अपनाई। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों की सीधी नियुक्ति कर दी गई।
RTI से नहीं मिला जवाब, फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इस मामले की जानकारी हासिल करने के लिए याचिकाकर्ता ने मंदिर समिति से आरटीआई के तहत नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। लेकिन समिति ने इसे गोपनीय बताते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया।
बाद में उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील भी की, जिस पर अक्टूबर 2023 में जवाब मिला। इसके बावजूद नियुक्तियों से जुड़े ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी कारण नवंबर 2023 में उन्होंने हाईकोर्ट इंदौर में याचिका दायर की।
19 मंदिरों में एक ही पुजारी?
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि महाकाल मंदिर परिसर के 19 मंदिरों में एक ही पुजारी की नियुक्ति दिखाई गई है, जो नियमों के खिलाफ है। सवाल यह उठता है कि आखिर एक ही पुजारी इतने मंदिरों का दायित्व कैसे संभाल सकता है।
सारिका गुरु के पति, जयराम चौबे का कहना है कि कई नियुक्तियां केवल रिश्तेदारी और प्रभाव के आधार पर की गई हैं। उनका आरोप है कि मंदिर समिति ने बिना सत्यापन और बिना योग्यता जांचे अपने परिचितों और परिजनों को नियुक्ति दी है।
अतिक्रमण और ठेकेदारी के भी आरोप
याचिका में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि भरत जोशी नामक व्यक्ति ने अधिकारियों से मिलीभगत कर 19 से अधिक मंदिरों में अतिक्रमण कर लिया है। बताया गया है कि इन मंदिरों को ठेके पर देकर निजी लाभ कमाया जा रहा है। जबकि शासन के नियम के अनुसार, एक व्यक्ति केवल एक ही मंदिर में पुजारी के रूप में कार्य कर सकता है।
पुजारियों और पुरोहितों की सूची पर विवाद
याचिका में मंदिर समिति द्वारा जारी की गई पुजारियों और पुरोहितों की सूची का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दर्ज कई नामों के बारे में दावा किया गया है कि उनका निधन हो चुका है, फिर भी उन्हें सूची में शामिल किया गया है।
इसके अलावा, कई पुजारियों के प्रतिनिधि उनके भाई, पुत्र या भतीजे हैं, जिससे नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट का संज्ञान
इंदौर हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए उज्जैन कलेक्टर से पूरे घटनाक्रम पर तीन महीने में जवाब मांगा है। अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि महाकाल मंदिर जैसी आस्था की नगरी में पुजारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियों पर उठे सवालों का क्या निष्कर्ष निकलता है।